न त्वहं तव धर्मज्ञ पश्याम्युपचयं क्वचित्।
न हि ते सेविता वृद्धा य एवं धर्ममब्रवी:॥ २६॥
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता भीष्म! मैं आपमें कोई उन्नति नहीं देखता। मेरा मानना है कि आपने कभी विद्वानों का संग नहीं किया। इसीलिए आप ऐसे धर्म का उपदेश देते हैं॥ 26॥
O Bhishma, who knows Dharma! I do not see any progress in you. I believe that you have never kept company with learned men. That is why you preach such Dharma.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)