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श्लोक 2.49.23  |
तां त्वयापि हृतां भीष्म कन्यां नैषितवान् यत:।
भ्राता विचित्रवीर्यस्ते सतां मार्गमनुष्ठित:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्म! आपके भाई विचित्रवीर्य ने आपके द्वारा अपहृत काशीराज की कन्या को गोद लेना नहीं चाहा, क्योंकि वह सत्यमार्ग पर चलने वाला पुरुष था॥ 23॥ |
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| Bhishma! Your brother Vichitravirya did not wish to adopt the daughter of the King of Kashi who was abducted by you, because he was a man who remained on the right path.॥ 23॥ |
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