येषामर्च्यतम: कृष्णस्त्वं च येषां प्रदर्शक:।
धर्मवांस्त्वमधर्मज्ञ: सतां मार्गादवप्लुत:॥ २०॥
अनुवाद
अथवा क्यों न हो, जिनके परम पूज्य देवता श्रीकृष्ण हैं और जिनका मार्गदर्शक आप जैसा पुण्यात्मा पुरुष है, जो सत्पुरुषों के मार्ग से च्युत हो गया है और धर्म के ज्ञान से रहित है।॥20॥
Or why not, those whose most revered deity is Krishna and whose guide is a virtuous person like you who has fallen from the path of good people and lacks knowledge of religion. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)