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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा
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श्लोक 19
श्लोक
2.49.19
नूनं प्रकृतिरेषा ते जघन्या नात्र संशय:।
अति पापीयसी चैषा पाण्डवानामपीष्यते॥ १९॥
अनुवाद
निश्चय ही तुम्हारा स्वभाव अत्यन्त नीच है, इसमें संशय नहीं है। अतः इन पाण्डवों का स्वभाव भी तुम्हारे समान अत्यन्त पापमय होता जा रहा है॥19॥
Certainly your nature is very lowly, there is no doubt about it. Therefore the nature of these Pandavas is also becoming very sinful like you.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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