श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  2.48.7-8h 
प्रसुप्ते हि यथा सिंहे श्वानस्तस्मिन् समागता:।
भषेयु: सहिता: सर्वे तथेमे वसुधाधिपा:॥ ७॥
वृष्णिसिंहस्य सुप्तस्य तथामी प्रमुखे स्थिता:।
 
 
अनुवाद
‘जैसे सिंह के सो जाने पर बहुत से कुत्ते उसके पास आकर एक साथ भौंकने लगते हैं, वैसे ही ये सामने खड़े राजा भी तब तक भौंकते रहते हैं, जब तक वृष्णिवंशी सिंह सोता रहता है॥7 1/2॥
 
‘Just as when a lion falls asleep, many dogs come near him and start barking together, similarly these kings standing in front are also barking as long as the lion of the Vrishni clan is sleeping.॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)