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वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्म के ये वचन सुनकर चेदिराज शिशुपाल उनसे कठोर वचन कहने लगा।
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Bhishma, the King of Chedi, Shishupal, began speaking harsh words to him.
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि शिशुपालवधपर्वणि युधिष्ठिराश्वासने चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें युधिष्ठिरको आश्वासन नामक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥