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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.48.15 
वैशम्पायन उवाच
इति तस्य वच: श्रुत्वा ततश्चेदिपतिर्नृप:।
भीष्मं रूक्षाक्षरा वाच: श्रावयामास भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्म के ये वचन सुनकर चेदिराज शिशुपाल उनसे कठोर वचन कहने लगा।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Bhishma, the King of Chedi, Shishupal, began speaking harsh words to him.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि शिशुपालवधपर्वणि युधिष्ठिराश्वासने चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें युधिष्ठिरको आश्वासन नामक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)