श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.48.14 
चतुर्विधानां भूतानां त्रिषु लोकेषु माधव:।
प्रभवश्चैव सर्वेषां निधनं च युधिष्ठिर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'युधिष्ठिर! माधव श्रीकृष्ण तीनों लोकों में चार प्रकार के प्राणियों - स्वेदज, अंडज, उद्भिज्ज और जरायुज - की उत्पत्ति और विनाश के स्थान हैं। 14॥
 
'Yudhisthira! Madhava Shri Krishna is the place of origin and destruction of the four types of beings in the three worlds – Swedaj, Andaj, Udbhijja and Jarayuj. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)