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mahabharat 2.48.11: भरत! निश्चय ही भगवान श्रीकृष्ण इस शिशुपाल में विद्यमान तेज को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 2.48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.48.11 
नूनमेतत् समादातुं पुनरिच्छत्यधोक्षज:।
यदस्य शिशुपालस्य तेजस्तिष्ठति भारत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरत! निश्चय ही भगवान श्रीकृष्ण इस शिशुपाल में विद्यमान तेज को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं॥ 11॥
 
'Bharata! Surely Lord Krishna wants to recapture the radiance that is present in this Shishupal.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)