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mahabharat 2.47.6-7h: उस समय आकाश से सहदेव के सिर पर पुष्पों की वर्षा होने लगी और अदृश्य रूप से खड़े हुए देवतागण उसे 'साधु', 'साधु' कहकर उसके साहस की प्रशंसा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  2.47.6-7h 
ततोऽपतत् पुष्पवृष्टि: सहदेवस्य मूर्धनि॥ ६॥
अदृश्यरूपा वाचश्चाप्यब्रुवन् साधु साध्विति।
 
 
अनुवाद
उस समय आकाश से सहदेव के सिर पर पुष्पों की वर्षा होने लगी और अदृश्य रूप से खड़े हुए देवतागण उसे 'साधु', 'साधु' कहकर उसके साहस की प्रशंसा करने लगे।
 
At that time flowers began to rain down from the sky on Sahadev's head, and the gods standing invisibly praised his courage by calling him 'Sadhu', 'Sadhu'. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)