Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.47.18: वह राजाओं का समूह अथाह समुद्र के समान उमड़ रहा था। उसका अन्त नहीं दिखाई देता था। सेनाएँ उसकी अनंत जलराशि थीं। उन्हें इस प्रकार शपथ लेते देख भगवान श्रीकृष्ण ने समझ लिया कि अब ये राजा युद्ध के लिए तैयार हैं॥18॥ | mahabharat अध्याय 2.47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह राजाओं का समूह अथाह समुद्र के समान उमड़ रहा था। उसका अन्त नहीं दिखाई देता था। सेनाएँ उसकी अनंत जलराशि थीं। उन्हें इस प्रकार शपथ लेते देख भगवान श्रीकृष्ण ने समझ लिया कि अब ये राजा युद्ध के लिए तैयार हैं॥18॥
That group of kings was swell like an endless ocean. There seemed to be no end to it. The armies were its infinite mass of water. Seeing them taking oath in this manner, Lord Krishna understood that now these kings are ready for war.॥ 18॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अर्घाभिहरणपर्वणि राजमन्त्रणे एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अर्घाभिहरणपर्वमें राजाओंकी मन्त्रणाविषयक उन्तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥