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mahabharat 2.47.11: इस प्रकार जब श्रीकृष्ण का पूजन पूर्ण हो गया, तब शत्रुओं को जीतने वाले शिशुपाल ने क्रोध से अत्यंत लाल नेत्रों से युक्त होकर सब राजाओं से कहा- 11॥   |   mahabharat अध्याय 2.47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.47.11 
तस्मिन्नभ्यर्चिते कृष्णे सुनीथ: शत्रुकर्षण:।
अतिताम्रेक्षण: कोपादुवाच मनुजाधिपान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब श्रीकृष्ण का पूजन पूर्ण हो गया, तब शत्रुओं को जीतने वाले शिशुपाल ने क्रोध से अत्यंत लाल नेत्रों से युक्त होकर सब राजाओं से कहा- 11॥
 
In this way, when the worship of Shri Krishna was completed, Shishupal, the conqueror of the enemy, with his eyes extremely red with anger, said to all the kings - 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)