श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 47: सहदेवकी राजाओंको चुनौती तथा क्षुब्ध हुए शिशुपाल आदि नरेशोंका युद्धके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.47.1 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा ततो भीष्मो विरराम महाबल:।
व्याजहारोत्तरं तत्र सहदेवोऽर्थवद् वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- हे जनमेजय! ऐसा कहकर महाबली भीष्म चुप हो गए। तत्पश्चात माद्रीकुमार सहदेव ने शिशुपाल के वचनों का यथोचित उत्तर देते हुए यह अर्थपूर्ण बात कही-॥1॥
 
Vaishampayana says- O Janamejaya! Having said this, the mighty Bhishma became silent. After that, Madrikumar Sahadeva gave a befitting reply to Shishupal's words and said this meaningful thing-॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)