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mahabharat 2.46.d72: ये चैत्यों और यूपों से परिपूर्ण, परम पुण्यमय, रमणीय और शुभ द्वारका को, उसके वनों और उपवनों सहित वरुणालय में विसर्जित कर देंगे।   |   mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.46.d72 
बहुपुण्यवतीं रम्यां चैत्ययूपवतीं शुभाम्॥
द्वारकां वरुणावासं प्रवेक्ष्यति सकाननाम्।
 
 
अनुवाद
ये चैत्यों और यूपों से परिपूर्ण, परम पुण्यमय, रमणीय और शुभ द्वारका को, उसके वनों और उपवनों सहित वरुणालय में विसर्जित कर देंगे।
 
These will immerse Dwaraka, full of Chaityas and Yupons, most virtuous, delightful and auspicious, in Varunalaya along with its forests and groves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)