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श्लोक  2.46.d57 
इन्द्रद्वीपो महेन्द्रेण गुप्तो मघवता स्वयम्॥
पारिजातो हृत: पार्थ केशवेन बलीयसा।
 
 
अनुवाद
पार्थ! यद्यपि इन्द्र पारिजात के द्वीप (रक्षक) बन गए थे, उन्होंने स्वयं उसकी रक्षा की थी, फिर भी महाबली केशव ने उस वृक्ष का अपहरण कर लिया।
 
Partha! Although Indra had become the island (protector) for Paarijaat, he himself protected it, yet the mighty Keshav kidnapped that tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)