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mahabharat 2.46.d46-d47: भरतश्रेष्ठ! भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस मुरादित्य का पाश काटकर, निशुम्भ और नरकासुर का वध करके प्राग्ज्योतिषपुर का मार्ग सबके लिए मुक्त कर दिया है। उन्होंने अपने धनुष की टंकार और पाञ्चजन्य शंख की गर्जना से समस्त भूपालों को आतंकित कर दिया है।   |   mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.46.d46-d47 
सूदिता मौरवा: पाशा निशुम्भनरकौ हतौ।
कृतक्षेम: पुन: पन्था: पुरं प्राग्ज्योतिषं प्रति॥
शौरिणा पृथिवीपालास्त्रासिता भरतर्षभ।
धनुषश्च प्रणादेन पाञ्चजन्यस्वनेन च॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस मुरादित्य का पाश काटकर, निशुम्भ और नरकासुर का वध करके प्राग्ज्योतिषपुर का मार्ग सबके लिए मुक्त कर दिया है। उन्होंने अपने धनुष की टंकार और पाञ्चजन्य शंख की गर्जना से समस्त भूपालों को आतंकित कर दिया है।
 
Bharatshrestha! Lord Shri Krishna cut the noose of the demon Muraditya, killed Nishumbha and Narakasura and made the path to Pragjyotishpur free for everyone. He has terrorized all the Bhupals with the sound of his bow and the roar of his Panchjanya conch.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)