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mahabharat 2.46.d26-d27: वहाँ महान एवं तेजस्वी भगवान महेश्वर हाथ में त्रिशूल लिए खड़े थे। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान श्रीकृष्ण मृत्यु के समान मुँह मोड़े हुए आ रहे हैं, तब शक्तिशाली महेश्वर हाथ में पिनाक नामक धनुष और बाण लेकर बाणासुर की सहायता के लिए श्रीकृष्ण के समक्ष आए।   |   mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.46.d26-d27 
तत्र तस्थौ महातेजा: शूलपाणिर्महेश्वर:।
पिनाकं सशरं गृह्य बाणस्य हितकाम्यया॥
ज्ञात्वा तमागतं कृष्णं व्यादितास्यमिवान्तकम्।
महेश्वरो महाबाहु: कृष्णाभिमुखमाययौ॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महान एवं तेजस्वी भगवान महेश्वर हाथ में त्रिशूल लिए खड़े थे। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान श्रीकृष्ण मृत्यु के समान मुँह मोड़े हुए आ रहे हैं, तब शक्तिशाली महेश्वर हाथ में पिनाक नामक धनुष और बाण लेकर बाणासुर की सहायता के लिए श्रीकृष्ण के समक्ष आए।
 
There the great and illustrious Lord Maheshwar was standing with a trident in his hand. When he came to know that Lord Krishna was coming with his face turned down like death, then the powerful Maheshwar came in front of Krishna with a bow named Pinak in his hand along with an arrow to help Banasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)