Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.45.d96: तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने भाई बलरामजी के साथ जाकर प्रसन्नतापूर्वक पिता के चरणों में प्रणाम किया। उस समय पिता वसुदेव के नेत्र प्रेमाश्रुओं से भर गए और उनका हृदय आनन्द के सागर में डूब गया। | mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने भाई बलरामजी के साथ जाकर प्रसन्नतापूर्वक पिता के चरणों में प्रणाम किया। उस समय पिता वसुदेव के नेत्र प्रेमाश्रुओं से भर गए और उनका हृदय आनन्द के सागर में डूब गया।
After that, Shri Krishna went with brother Balramji and happily bowed at the feet of his father. At that time, father Vasudev's eyes filled with tears of love and his heart became immersed in the ocean of joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥