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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d93
 
 
श्लोक  2.45.d93 
तत: शौरि: सुपर्णेन स्वं निवेशनमभ्ययात्॥
चकाराथ यथोद्देशमीश्वरो मणिपर्वतम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्रीकृष्ण गरुड़ के माध्यम से अपने महल में चले गए, जहाँ भगवान ने एक उपयुक्त स्थान पर मणि पर्वत की स्थापना की।
 
Thereafter Shri Krishna went to his palace through Garuda. There the Supreme Lord established Mani Parvat at a suitable place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)