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mahabharat 2.45.d86: पांचजन्य की गंभीर घोषणा सुनकर और गरुड़ को देखकर, कुकुर और अंधकवंशी यादव शोक से मुक्त हो गए।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d86 
पाञ्चजन्यस्य निर्घोषं निशम्य कुकुरान्धका:॥
विशोका: समपद्यन्त गरुडस्य च दर्शनात्।
 
 
अनुवाद
पांचजन्य की गंभीर घोषणा सुनकर और गरुड़ को देखकर, कुकुर और अंधकवंशी यादव शोक से मुक्त हो गए।
 
On hearing the solemn proclamation of Panchajanya and seeing Garuda, the Kukura and Andhakavanshi Yadavas became free from grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)