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श्लोक  2.45.d83 
एवमालोकयांचक्रुर्द्वारकामृषभास्त्रय:।
उपेन्द्रबलदेवौ च वासवश्च महायशा:॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उपेन्द्र (श्रीकृष्ण), बलराम और महाबली इन्द्र, इन तीनों महापुरुषों ने द्वारकापुरी की शोभा देखी।
 
In this way, Upendra (Shri Krishna), Balram and the great Indra, these three great men saw the beauty of Dwarkapuri.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)