श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d75
 
 
श्लोक  2.45.d75 
कुमुदोत्पलपूर्णाश्च वाप्य: कूपा: सहस्रश:।
समाकुलमहावाप्य: पीता लोहितवालुका:॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण की गृह वाटिका में कमल और कुमुदिनियों से भरी अनेक छोटी-छोटी बावड़ियाँ हैं। हज़ारों कुएँ बनाए गए हैं। पानी से भरे बड़े-बड़े कुएँ भी तैयार किए गए हैं, जिनका रंग पीला है और जिनकी रेत लाल है।
 
There are many small stepwells filled with lilies and lotuses in Lord Krishna's home garden. Thousands of wells have been built. Large wells filled with water have also been prepared, which are yellow in colour and whose sand is red.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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