Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.45.d64-d73: सहस्र पंखुड़ी वाला कमल, सहस्त्र मंदार, अशोक, कर्णिकार, तिलक, नागमल्लिका, कुरव (कटसरैया), नागपुष्प, चंपक, घास, गुल्म, सप्तपर्णा (चितवन), कदंब, नीप, कुर्बक, केतकी, केसर, हिरणताल, ताल, ताटक, ताल, प्रियंगु, वकुल (मौलसिरी), पिंडिका, बीजपुर (बिजौरा), अंगूर, आंवला, खजूर, मुनक्का, जामुन, आम, कटहल, अंकोल, तिल, तिंदुक, लिकुचा (लीची), आम्र, क्षीरिका (काकोली या पिंड खजूर नामक जड़ी-बूटी), कंटकी (बेर), नारियल, इंगुड (हिंगोट), उत्क्रोशाकवन, कदलीवन, जाति (चमेली), मल्लिका (मोती), पाताल, भल्लातक, कपिथ, तैतभा, बंधुजीव (दुपहरिया), मूंगा, अशोक और कश्मीरी (गंभारी) आदि सभी प्रकार के प्राचीन वृक्ष, प्रियंगुलता, बेर, जौ, स्पंदन, चंदन, शमी, बिल्व, पलाश, पाटला, बड़, पीपल, गूलर, द्विदल, पलाश, परिभद्रक, इंद्रवृक्ष, अर्जुनवृक्ष, अश्वत्थ, चिरिबिल्व, सौभंजन, भल्लाट, अश्वपुष्प, सर्ज, तंबूलता, लौंग, सुपारी और नाना. द्वारकापुरी में श्रीकृष्ण भवन के चारों ओर सभी प्रकार के बांस लगे हुए हैं। | mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह