श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  2.45.d51 
तेषां तु विहिता: सर्वे रुक्मदण्डा: पताकिन:।
सदने वासुदेवस्य मार्गसंजनना ध्वजा:॥
 
 
अनुवाद
वासुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के सुन्दर भवन में सभी मार्गदर्शक ध्वजों के दण्ड स्वर्ण के बने हैं। उन सभी पर ध्वजाएँ लहराती रहती हैं।
 
The poles of all the guiding flags in the beautiful house of Vasudevanandan Sri Krishna are made of gold. Flags keep fluttering on all of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)