Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.45.d47-d48: युधिष्ठिर! द्वारका का दूसरा मुख्य महल सभी शिल्पियों ने मिलकर बनाया है। वह अत्यंत सुंदर भवन मुस्कुराता हुआ खड़ा है। सभी शिल्पी उसके निर्माण कौशल की प्रशंसा करते हैं। उस महल का नाम केतुमान है। यह भगवान वासुदेव की रानी सुदत्तदेवी का सुंदर निवास है। | mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर! द्वारका का दूसरा मुख्य महल सभी शिल्पियों ने मिलकर बनाया है। वह अत्यंत सुंदर भवन मुस्कुराता हुआ खड़ा है। सभी शिल्पी उसके निर्माण कौशल की प्रशंसा करते हैं। उस महल का नाम केतुमान है। यह भगवान वासुदेव की रानी सुदत्तदेवी का सुंदर निवास है।
Yudhishthira! The second main palace in Dwarka has been built by all the craftsmen together. That very beautiful building stands smiling. All the craftsmen praise its construction skills. The name of that palace is Ketuman. It is the beautiful residence of Sudattadevi, the queen of Lord Vasudev.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥