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श्लोक  2.45.d42-d43 
जाम्बूनदप्रदीप्ताग्र: प्रदीप्तज्वलनोपम:।
सागरप्रतिमोऽतिष्ठन्मेरुरित्यभिविश्रुत:॥
तस्मिन् गान्धारराजस्य दुहिता कुलशालिनी।
सुकेशी नाम विख्याता केशवेन निवेशिता॥
 
 
अनुवाद
जिसका द्वार बैंगनी सोने के समान चमकता है, जो प्रज्वलित अग्नि के समान प्रतीत होता है। उस महान महल में, जिसकी विशालता समुद्र के समान है, जो मेरु नाम से प्रसिद्ध है, भगवान श्रीकृष्ण ने गांधार के राजा की कुलीन पुत्री सुकेशी को रखा है।
 
Whose door glows like purple gold, which looks like blazing fire. In that great palace which is likened to the ocean in its vastness, which is known as Meru, Lord Shri Krishna has placed Sukeshi, the noble daughter of the king of Gandhara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)