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श्लोक  2.45.d40-d41 
स च प्रासादमुख्योऽत्र जाम्बवत्या विभूषित:।
प्रभया भूषणैश्चित्रैस्त्रैलोक्यमिव भासयन्॥
यस्तु पाण्डरवर्णाभस्तयोरन्तरमाश्रित:।
विश्वकर्माकरोदेनं कैलासशिखरोपमम्॥
 
 
अनुवाद
इसके अलावा, मुख्य महल, जो रुक्मिणी और सत्यभामा के महलों के बीच स्थित है और जिसकी उज्ज्वल आभा चारों ओर फैली हुई है, जाम्बवती देवी द्वारा सुशोभित है। ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपनी दिव्य आभा और विचित्र अलंकरणों से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा हो। इसका निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया है। जाम्बवती का वह विशाल महल कैलाश पर्वत के समान शोभायमान है।
 
Apart from this, the main palace, which is situated between the palaces of Rukmini and Satyabhama and whose bright radiance spreads all around, has been decorated by Jambvati Devi. It seems as if it is illuminating the three worlds with its divine radiance and strange decorations. It has also been built by Vishwakarma. That huge palace of Jambvati is as beautiful as the peak of Kailash.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)