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mahabharat 2.45.d38: श्री कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा सदैव एक श्वेत महल में रहती हैं, जिसमें विचित्र रत्नों से सीढ़ियाँ बनी हैं। इसमें प्रवेश करते ही लोगों को (गर्मियों में भी) शीतलता का अनुभव होता है।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d38 
सत्यभामा पुनर्वेश्म सदा वसति पाण्डरम्।
विचित्रमणिसोपानं यं विदु: शीतवानिति॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा सदैव एक श्वेत महल में रहती हैं, जिसमें विचित्र रत्नों से सीढ़ियाँ बनी हैं। इसमें प्रवेश करते ही लोगों को (गर्मियों में भी) शीतलता का अनुभव होता है।
 
Satyabhama, the second wife of Shri Krishna, always lives in a white palace, in which steps are made of strange gems. On entering it, people feel cool (even in summer).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)