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mahabharat 2.45.d21: वहाँ जाने के लिए आठ मार्ग हैं, बड़े-बड़े द्वार हैं और सोलह बड़े-बड़े चौराहे हैं। इस प्रकार विविध मार्गों से सुशोभित द्वारकापुरी शुक्राचार्य की नीति के अनुसार निर्मित की गई है।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d21 
अष्टमार्गां महाकक्ष्यां महाषोडशचत्वराम्।
एवं मार्गपरिक्षिप्तां साक्षादुशनसा कृताम्॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाने के लिए आठ मार्ग हैं, बड़े-बड़े द्वार हैं और सोलह बड़े-बड़े चौराहे हैं। इस प्रकार विविध मार्गों से सुशोभित द्वारकापुरी शुक्राचार्य की नीति के अनुसार निर्मित की गई है।
 
There are eight routes to go there, there are big gates and sixteen big crossings. Thus, Dwarkapuri, which is decorated with various routes, has been built according to the policy of Shukracharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)