श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  2.45.d20 
अष्टयोजनविस्तीर्णामचलां द्वादशायताम्।
द्विगुणोपनिवेशां च ददर्श द्वारकां पुरीम्॥
 
 
अनुवाद
द्वारकापुरी की चौड़ाई आठ योजन और लंबाई बारह योजन है, अर्थात् कुल 96 योजन में फैली हुई है। इसका उपनिवेश (आस-पास का क्षेत्र) उससे दुगुना अर्थात् 192 योजन है। वह नगरी सब प्रकार से अचल है। श्रीकृष्ण ने उस नगरी को देखा।
 
The width of Dwarkapuri is eight yojanas and its length is twelve yojanas, i.e. it is spread over a total of 96 yojanas. Its colony (nearby region) is twice that, i.e. 192 yojanas. That city is unshakable in every way. Shri Krishna saw that city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)