vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश
»
श्लोक d18
श्लोक
2.45.d18
तीक्ष्णयन्त्रशतघ्नीभिर्यन्त्रजालै: समन्विताम्।
आयसैश्च महाचक्रैर्ददर्श द्वारकां पुरीम्॥
अनुवाद
भगवान ने तीक्ष्ण यंत्रों, शतघ्नी, विविध यंत्रों के समूह तथा लोहे के बने विशाल चक्रों से सुरक्षित द्वारकापुरी देखी।
The Lord saw Dwarkapuri protected by sharp instruments, Shataghni, group of various instruments and huge chakras made of iron.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×