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mahabharat 2.45.d143: हे महाबाहु युधिष्ठिर! यह शार्ङ्ग नामक धनुषधारी भगवान श्रीकृष्ण की विजय की कथा है। इसी कारण महात्मा श्रीकृष्ण को मनुष्यों में अवतरित कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d143 
एष तात महाबाहो विजय: शार्ङ्गधन्वन:॥
एतदर्थं च जन्माहुर्मानुषेषु महात्मन:।
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु युधिष्ठिर! यह शार्ङ्ग नामक धनुषधारी भगवान श्रीकृष्ण की विजय की कथा है। इसी कारण महात्मा श्रीकृष्ण को मनुष्यों में अवतरित कहा गया है।
 
Tat! Mighty-armed Yudhishthir! This is the story of the victory of Lord Krishna who wields the bow named Sharanga. For this reason, Mahatma Shri Krishna is said to have incarnated among humans.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)