Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.45.d141: वहाँ सदा प्रसन्न रहने वाले श्रीकृष्ण रुक्मिणीदेवी के साथ महान सुख का अनुभव करने लगे। तत्पश्चात् यदुओं में श्रेष्ठ, सदा लीलाओं में संलग्न रहने वाले श्रीकृष्ण क्रमशः सत्यभामा और जाम्बवती आदि समस्त देवियों के धामों में गये। | mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रुक्मिण्या सहितो देव्या प्रमुमोद सुखी सुखम्।
अनन्तरं च सत्याया जाम्बवत्याश्च भारत।
सर्वासां च यदुश्रेष्ठ: सर्वकालविहारवान्॥
अनुवाद
वहाँ सदा प्रसन्न रहने वाले श्रीकृष्ण रुक्मिणीदेवी के साथ महान सुख का अनुभव करने लगे। तत्पश्चात् यदुओं में श्रेष्ठ, सदा लीलाओं में संलग्न रहने वाले श्रीकृष्ण क्रमशः सत्यभामा और जाम्बवती आदि समस्त देवियों के धामों में गये।
There, Shri Krishna, who was always happy, started experiencing great happiness with Rukminidevi. India After that, the best of Yadus, Shri Krishna, who always indulges in pastimes, went to the abodes of all the goddesses like Satyabhama and Jambavati respectively.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥