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mahabharat 2.45.d139: उस समय बालक, वृद्ध, विद्वान, कुल और बंधु-बांधवों सहित सभी वृष्णिवंशी लोग प्रसन्नतापूर्वक भगवान मधुसूदन के पास बैठ गए।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d139 
सबाला: सहवृद्धाश्च सज्ञातिकुलबान्धवा:॥
उपोपविविशु: प्रीता वृष्णयो मधुसूदनम्।
 
 
अनुवाद
उस समय बालक, वृद्ध, विद्वान, कुल और बंधु-बांधवों सहित सभी वृष्णिवंशी लोग प्रसन्नतापूर्वक भगवान मधुसूदन के पास बैठ गए।
 
At that time, all the Vrishni people including children, old people, scholars, clan and relatives happily sat near Lord Madhusudan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)