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mahabharat 2.45.d137: उस सभा में लोगों ने बलराम और श्रीकृष्ण की इस बहन को देखा; मानो देवी लक्ष्मी दो महान गजराजों के बीच स्वर्ण कमल के आसन पर बैठी हुई हों।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d137 
ददृशुस्तां सभामध्ये भगिनीं रामकृष्णयो:॥
रुक्मपद्मशयां पद्मां श्रीमिवोत्तमनागयो:।
 
 
अनुवाद
उस सभा में लोगों ने बलराम और श्रीकृष्ण की इस बहन को देखा; मानो देवी लक्ष्मी दो महान गजराजों के बीच स्वर्ण कमल के आसन पर बैठी हुई हों।
 
People saw this sister of Balram and Shri Krishna in that meeting; As if Goddess Lakshmi was sitting on a golden lotus seat between two great Gajrajas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)