Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.45.d135-d136: तब भगवान बलराम ने आगे बढ़कर उस अभिमानी बहन को अपने बाएँ हाथ से पकड़ लिया और स्नेह से उसका माथा सूँघा। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने भी उस कन्या को अपने दाहिने हाथ से पकड़ लिया। | mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स भगवान् रामस्तामुपाक्रम्य भामिनीम्॥
मूर्ध्न्युपाघ्राय सव्येन परिजग्राह पाणिना।
दक्षिणेन कराग्रेण परिजग्राह माधव:॥
अनुवाद
तब भगवान बलराम ने आगे बढ़कर उस अभिमानी बहन को अपने बाएँ हाथ से पकड़ लिया और स्नेह से उसका माथा सूँघा। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने भी उस कन्या को अपने दाहिने हाथ से पकड़ लिया।
Then Lord Balarama went forward and held that proud sister with his left hand and smelled her forehead with affection. Thereafter Shri Krishna also held that girl with his right hand.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥