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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश
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श्लोक d13
श्लोक
2.45.d13
सुकक्षं परिवार्यैनं चित्रपुष्पं महावनम्॥
शतपत्रवनं चैव करवीरकुसुम्भि च।
अनुवाद
सुकक्ष पर्वत को चारों ओर से घेरकर चित्रपुष्प, शतपत्रवन, करवीरवन तथा कुसुम्भिवन नामक महावन सुशोभित हैं।
Mahavan named Chitrapushpa, Shatapatravan, Karveervan and Kusumbhivan are adorned by surrounding the Sukaksha mountain from all sides.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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