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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d115
 
 
श्लोक  2.45.d115 
भोजं च कृतवर्माणमन्यांश्चान्धकवृष्णिषु।
आमन्त्र्य देवप्रवरो वासवो वासवानुजम्॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भोज, कृतवर्मा तथा अन्य अंधकवंशियों तथा वृष्णिवंशियों को गले लगाकर देवराज ने अपने छोटे भाई श्रीकृष्ण से विदा ली।
 
After that, after embracing Bhoj, Kritavarma and other Andhakavanshi and Vrishnivanshi, Devraj took leave from his younger brother Shri Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)