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भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा तत: सर्वानामन्त्र्य कुकुरान्धकान्।
सस्वजे रामकृष्णौ च वसुदेवं च वासव:॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! कुकुर और अंधक कुल के सब लोगों से ऐसा कहकर देवराज इन्द्र ने उन सबसे विदा लेकर बलराम, श्रीकृष्ण और वसुदेव को हृदय से लगा लिया।
Bhishmaji says- Yudhishthira! After saying this to all the people of the Kukura and Andhaka clan, Devraj Indra took leave of them all and embraced Balarama, Shri Krishna and Vasudev.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥