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श्लोक  2.45.d101 
सा केशवमहामात्रैर्महेन्द्रप्रमुखै: सह॥
शुशुभे वृष्णिशार्दूलै: सिंहैरिव गिरेर्गुहा।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार पर्वत की गुफा सिंहों से सुशोभित होती है, उसी प्रकार उस समय द्वारकापुरी भगवान श्रीकृष्ण, देवराज इन्द्र तथा वृष्णिवंश के वीर नर सिंहों से सुशोभित थी।
 
Just as the cave of a mountain is adorned with lions, in the same way Dwarkapuri at that time was adorned with Lord Shri Krishna, Devraj Indra and the brave male lions of Vrishni dynasty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)