श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d95
 
 
श्लोक  2.44.d95 
भीष्म उवाच
उवाच स यदुश्रेष्ठ: सर्वास्ता जातमन्मथा:।
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! उन सबके हृदय में भगवान के प्रति काम भावना थी। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा।
 
Bhishmaji says- Yudhishthir! There was a feeling of lust towards God in the hearts of all of them. At that time Lord Krishna said to him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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