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mahabharat 2.44.d93: यह बड़े सौभाग्य की बात है कि मुनियों में प्रमुख महात्मा नारद के वचन आज आपके दर्शन मात्र से सत्य होने जा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d93
 
 
श्लोक  2.44.d93 
दिष्टॺा तस्यर्षिमुख्यस्य नारदस्य महात्मन:।
वचनं दर्शनादेव सत्यं भवितुमर्हति॥
 
 
अनुवाद
यह बड़े सौभाग्य की बात है कि मुनियों में प्रमुख महात्मा नारद के वचन आज आपके दर्शन मात्र से सत्य होने जा रहे हैं।
 
It is a matter of great fortune that the words of Mahatma Narada, the chief among sages, are going to come true today merely by seeing you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)