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mahabharat 2.44.d91: कन्याओं ने कहा- यह बड़े हर्ष की बात है कि पूर्वकाल में वायुदेव तथा समस्त प्राणियों के प्रति कृतज्ञ महर्षि नारदजी ने जो कहा था, वह सत्य हो गया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d91
 
 
श्लोक  2.44.d91 
कन्यका ऊचु:
सत्यं बत पुरा वायुरिदमस्मानिहाब्रवीत्।
सर्वभूतकृतज्ञश्च महर्षिरपि नारद:॥
 
 
अनुवाद
कन्याओं ने कहा- यह बड़े हर्ष की बात है कि पूर्वकाल में वायुदेव तथा समस्त प्राणियों के प्रति कृतज्ञ महर्षि नारदजी ने जो कहा था, वह सत्य हो गया।
 
The girls said - It is a matter of great joy that what Vayudev and Maharishi Naradji, who was grateful to all creatures, had said in the past, has come true.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)