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mahabharat 2.44.d90: भगवान के मुख और चन्द्रमा को देखकर उनकी सारी इन्द्रियाँ प्रसन्न हो गईं और हर्ष से भरकर वे पुनः महाबाहु श्रीकृष्ण से इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d90
 
 
श्लोक  2.44.d90 
तस्य चन्द्रोपमं वक्त्रमुदीक्ष्य मुदितेन्द्रिया:।
सम्प्रहृष्टा महाबाहुमिदं वचनमब्रुवन्॥
 
 
अनुवाद
भगवान के मुख और चन्द्रमा को देखकर उनकी सारी इन्द्रियाँ प्रसन्न हो गईं और हर्ष से भरकर वे पुनः महाबाहु श्रीकृष्ण से इस प्रकार बोले।
 
Seeing the Lord's face and moon, all their senses became elated and filled with joy they again spoke to the mighty-armed Shri Krishna in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)