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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d77-d78
 
 
श्लोक  2.44.d77-d78 
हर्म्याणि च विशालानि मणिसोपानवन्ति च।
तत्रस्था वरवर्णाभा ददृशुर्मधुसूदनम्॥
गन्धर्वसुरमुख्यानां प्रिया दुहितरस्तदा।
त्रिविष्टपसमे देशे तिष्ठन्तमपराजितम्॥
 
 
अनुवाद
उन महलों में विशाल छतें थीं, जिन पर चढ़ने के लिए रत्नजड़ित सीढ़ियाँ बनी थीं। वहाँ रहने वाले प्रमुख गंधर्वों और सुरों की परम सुंदरी एवं प्रिय कन्याओं ने उस स्वर्ग-समान प्रदेश में खड़े हुए अपराजित वीर भगवान मधुसूदन को देखा।
 
There were huge terraces in those palaces, which were decorated with stairs made of gems to climb. The most beautiful and beloved daughters of the chief Gandharvas and Suras living there saw the undefeated brave Lord Madhusudan standing in that heaven-like region.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)