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mahabharat 2.44.d76: वह अनमोल पर्वत, विचित्र स्वर्णिम झण्डियों वाले महलों से सुशोभित, चित्रित बादलों के समान प्रतीत हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d76
 
 
श्लोक  2.44.d76 
चित्रग्रथितमेघाभ: प्रबभौ मणिपर्वत:।
हेमचित्रपताकैश्च प्रासादैरुपशोभित:॥
 
 
अनुवाद
वह अनमोल पर्वत, विचित्र स्वर्णिम झण्डियों वाले महलों से सुशोभित, चित्रित बादलों के समान प्रतीत हो रहा था।
 
That precious mountain, adorned with palaces with strange golden flags, looked like painted clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)