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mahabharat 2.44.d75: मधुसूदन ने देखा कि उस अन्तःकक्ष के द्वार और भवन वैदूर्य रत्नों के समान चमक रहे थे। उनके द्वारों पर ध्वजाएँ लहरा रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d75
 
 
श्लोक  2.44.d75 
तत्र वैडूर्यवर्णानि ददर्श मधुसूदन:।
सतोरणपताकानि द्वाराणि शरणानि च॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन ने देखा कि उस अन्तःकक्ष के द्वार और भवन वैदूर्य रत्नों के समान चमक रहे थे। उनके द्वारों पर ध्वजाएँ लहरा रही थीं।
 
Madhusudan saw that the doors and houses of that inner chamber were shining like vaidurya gems. Flags were fluttering on their gates.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)