Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d7: नरकासुर प्राग्ज्योतिषपुर का राजा था। उसके दुःख, भय और बाधाएँ दूर हो गईं। उसने कशेरूक को मूर्छित करके परास्त किया और अपने घर ले जाकर उसे यह बात बताई। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रमथ्य च जहारैतां हृत्वा च नरकोऽब्रवीत्।
नष्टशोकभयाबाध: प्राग्ज्योतिषपतिस्तदा॥
अनुवाद
नरकासुर प्राग्ज्योतिषपुर का राजा था। उसके दुःख, भय और बाधाएँ दूर हो गईं। उसने कशेरूक को मूर्छित करके परास्त किया और अपने घर ले जाकर उसे यह बात बताई।
Narakasur was the king of Pragjyotishpur. His sorrows, fears and obstacles were gone. He defeated Vertebrae by making him unconscious and brought him to his house and told him this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥