Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d68-d69: हे शत्रुओं का नाश करने वाले! ये उत्तम ऊनी वस्त्र, अनेक प्रकार के शय्याएँ, अनेक आसन, आपकी इच्छानुसार बोलने वाले सुन्दर पक्षी, चंदन और अगुरुमिश्रित अनेक प्रकार के रथ - ये सब वस्तुएँ मैं वृष्णियों के धाम द्वारका में आपको दे दूँगा। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आविकानि च सूक्ष्माणि शयनान्यासनानि च।
कामव्याहारिणश्चैव पक्षिण: प्रियदर्शना:॥
चन्दनागुरुमिश्राणि यानानि विविधानि च।
एतत् ते प्रापयिष्यामि वृष्ण्यावासमरिंदम॥
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले! ये उत्तम ऊनी वस्त्र, अनेक प्रकार के शय्याएँ, अनेक आसन, आपकी इच्छानुसार बोलने वाले सुन्दर पक्षी, चंदन और अगुरुमिश्रित अनेक प्रकार के रथ - ये सब वस्तुएँ मैं वृष्णियों के धाम द्वारका में आपको दे दूँगा।
O destroyer of enemies! These fine woollen clothes, many kinds of beds, many seats, beautiful looking birds that can speak as per your wish, sandalwood and various types of chariots mixed with aguru - I will deliver all these things to you at Dwarka, the abode of the Vrishnis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥