Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d62-d63: नरकासुर का आंतरिक महल सोने के समान सुंदर, चमकदार और चमकीला था। उसके भवन में जो अपार और अक्षय धन दिखाई देता था, वह राजा कुबेर के धन से भी अधिक था। देवराज इंद्र के महल में भी ऐसी भव्यता पहले कभी नहीं देखी गई थी। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिरण्यवर्णं रुचिरं श्वेतमभ्यन्तरं गृहम्।
यदक्षयं गृहे दृष्टं नरकस्य धनं बहु॥
न हि राज्ञ: कुबेरस्य तावद् धनसमुच्छ्रय:।
दृष्टपूर्व: पुरा साक्षान्महेन्द्रसदनेष्वपि॥
अनुवाद
नरकासुर का आंतरिक महल सोने के समान सुंदर, चमकदार और चमकीला था। उसके भवन में जो अपार और अक्षय धन दिखाई देता था, वह राजा कुबेर के धन से भी अधिक था। देवराज इंद्र के महल में भी ऐसी भव्यता पहले कभी नहीं देखी गई थी।
Narakasur's inner palace was beautiful, lustrous and bright like gold. The immense and inexhaustible wealth seen in his house was more than the wealth of King Kubera. Even the palace of Devraj Indra had never seen such splendor before.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥