Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d61: वहाँ जम्बुनद और शतकुम्भ संज्ञक जैसी सोने से बनी ऐसी अनेक वस्तुएँ दिखाई दे रही थीं, जो धधकती हुई अग्नि और शीतकाल के उज्ज्वल चन्द्रमा के समान चमक रही थीं। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ जम्बुनद और शतकुम्भ संज्ञक जैसी सोने से बनी ऐसी अनेक वस्तुएँ दिखाई दे रही थीं, जो धधकती हुई अग्नि और शीतकाल के उज्ज्वल चन्द्रमा के समान चमक रही थीं।
Many such objects made of gold like Jambunad and Shatkumbh Sangyak were visible there, which were shining like blazing fire and winter bright moon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥